The Outside Edge…

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एहसास

एहसास  तो हुआ कुछ छूट जाने का …

पर क़दमों की तेज़ी ने भुला दिया !

कुछ मुस्कुराहटों , खिलखिलाहटों के बीच ,

एहसास तो हुआ बहुत कुछ पा लेने का

पर ‘कुछ’ फिर भी नहीं था!

एक दिन यूँ ही जब ‘क्या, क्यों, कैसे’ के बादलों ने घेरा

तब एहसास हुआ , खुद को ही न पहचान पाने का…

एहसास हुआ , खुद को कहीं  पीछे छोड़ आने का..

अब वापस जाना न तो मुमकिन था, न ही कोई ऐसा इरादा..

पीछे मुड़ , जोर से आवाज़ लगाई  है, खुद को..

और अब बस जवाब का इंतज़ार है .

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Black on White!!

I am nothing without you,

But I cannot be just you!

You are here to bring best out of me!

And when you are gone am lost in my glee!

You are the dark evil around,

Within, it’s me – The kindness  abound!!

I could be anyone…

But you make me – The One!

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कब से उस ख़ाली कैनवस को घूरते हुये बैठा है!

हर एक रंग छू कर देख चूका है,

पर हर रंग एक नया ही सुराग देता है!

लाल पर हाँथ रखा तो बोला – “अब मुझ जैसा रोष नहीं है उसमे”,

गुलाबी को छुआ तो याद आ गया गालों के साथ साथ उसकी बोझिल आँखों का रंग!

धानी और केसरी तो जाने कितनी बार ओढ़ा चुका तो वो उसे!

नीली रंग की बोतल, वो ख़ाली है…

पिछली बार उसके ख्वाबों की उड़ान इसी से भरी थी!
बड़ी उलझन मे था बेचारा…
या तो रंगों से ये पेंटर ऊब चुका था,या उसकी कल्पना इन रंगों से परे हो चली थी!
इसी उधेड़-बुन मे वो काली स्याही की शीशी उड़ेल दी उसने चमकते से सफ़ेद कैनवस पर!
स्याही की बोतल खुली और जाने कितनी धारें बह गयीं…
होले से फूँक कर कुछ का रुख बदल दिया, तो कपड़े से सोक कुछ को रोक दिया!
ऐसे ही खिलवाड़ करता रहा कुछ देर,
फिर अनजाने मे ही कुछ कदम पीछे हट, वो स्याही से रंगा हाँथ अपने गाल पर रख मुस्कुरा दिया!
क्योंकि उसकी कल्पना भी आज बिना रंगों के ही मुस्कुरा रही थी!!
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* Yes i love self potraits!!!

Hello World!

It fluttered its wings for the very first time!

It’s ready to know the world it’s going to belong!

A little flight, then a pause and again some flutter…

That’s her way to get introduced to each one of them!!

By now she knows all Greens, Yellows, Pinks and Reds!!

A little far away she saw Grays, Browns, Blacks too…

They were all inside a box – an unknown world…

The curiosity showed her the way in!

The constant Khat- Pat- Tak suddenly stopped and all eyes were on her!

She paused on the white board,

Followed the blue back lines,

Sat on the brown ‘blinds’,

Gave a light knock on the colorless glass,

Even tried waking up the only ‘colorful’ color too!

But the Unknown just remained Unknown!

The Khat-Pat- tak is been resumed now!

Smell of pink and reds are here to take her back!!

I saw her flutter then take her longest flight…

And I knew she will never come back!!

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कोरा कागज़!

पन्ने कोरे ही रह जाते, स्याही की बोतल जो ना खुल पाती कभी!

गुम से हो जाते अक्षर, गर पैनी न होती उस कलम ही धार!

बेमतलब सी होती उससे निकली हर नज़्म, गर कोने मे तुड़े मुड़े उस कागज़ मे अधूरी सी शब्दों की लड़ी जो न पड़ी होती!

और हर ऐसी नज़्म अपने मुकाम पर न पहुँच पाती, गर किसी पढ़ने वाले की आँख का आंसू,

कभी यूँ ही हंस कर, कभी दबी सुबक के साथ भिगो न जाता उसे!

पर आज keyboard की खटर पटर में लगता है दब जाएगी मेरी आवाज़,

या इस शोर में दो लाईने लिख रुक जायेंगे मेरे हाँथ!

सन्नाटे बुला कर लाने पड़ते हैं दो से चार, चार से छ: करने इन शब्दों को!

लिखते लिखते जब अनमने से लगने लगते हैं ये शब्द तो ये backspace key दबा देती हूँ!

कितनी ही अद्कही कहानियां इसकी बलि चढ़ गयीं!

किसी को एहसास भी नहीं हुआ उनके वजूद का, क्योंकि कचरे की टोकरी मे गवाही देने को कोई नज़्म नहीं पड़ी थी!

फिर ताकने लगती हूँ इस blank screen को,

कोने मे चकता वो उतावला सा cursor फिर से भर देता है कोई जोश मुझमें!

और वैसे भी हुज़ूर अन्दर की आवाज़ हैं बाहर का शोर दबा ही देगी!!!

ये थी मेरी सफाई की क्यों लग गया मुझे इतना वक़्त कुछ लिखने में!

Reflection

It’s time to look back and reflect! Things which made this year memorable for me !


I got back  to writing and  started this blogPari’phery! (This is the 50th post)

Started leaning Violin – the first ever music instrument I am learning!

My singing is improving (side effect of leaning Violin) – certified by Anindya and My Violin Teacher

Visited some wonderful  places

Got a Solitire from my parents – Love you Ma and Papa 🙂

Started living in a nice house – I love decorating it!

Realized the value of friends and  family more then ever

Made few new friends for life time!

Got back my Creative Frustration syndrome too

Attended three marriages (this is good, the count was 0 for previous 3 years all together)

Wore wrong chappals (belonging to  two different pairs) for whole day in Office 😀

Got spects… I look serious now 🙂

Didn’t get even a single ‘Bronchitis Attack’  🙂

Enjoyed some beautiful , breathtaking sunsets while sipping tea at my desk

Tried Vodka for the first time (I am honest :|, really)

And the last one I learned to move on!!!

I will be happy to know the things which made this year memorable for you…do let me know!! 🙂


Wish you a Happy New Year!

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खाता

साल ख़तम होने को आया, खाता खोल हिसाब करने बैठी हूँ!

हिसाब लगाना है घड़ी की उस टिक टिक का, जो फ़िज़ूल ही ज़ाया हो गयी!

जिन्हें ज़ाया नहीं किया उन लम्हों के बदले क्या पाया इसका भी लेखा जोखा करना है !

उम्मीदों की  कमी और आंसूओं  की धार में जब सब कुछ डूबता सा दिख रहा था,

तब कुछ अपनों ने उधार मे हंसी दी थी!

व़ोह तो वापस लौटा दी, बस उस पर का सूद अभी देना बाकि है!

बकाया तो उन आंसूओं का हिसाब भी है, पर मैंने वो पन्ना ही फाड़ फ़ेंक दिया किताब से!

हिसाब करना है उन सपनों का जिन्हें वक़्त की  तिज़ोरी से निकाल खर्च  कर दिया!

और गिनकर वापस रखने हैं वो जिनका वक़्त अभी नहीं आया है!

क्या खोया क्या पाया – जोड़ घटा जो बचा वही मुनाफा है!

कुछ नयी उम्मीदें,  कुछ खिलखिलाते सपने , कुछ बेबाक इरादे …

Kashamkash!

अँधेरा खींच ये रोशिनी, गुम कर देगा इस लौ को,

या नन्ही सी ये लौ दूर भगा देगी सन्नाटों में पांव पसरे इस अँधेरे को!

लौ से लिपटा ये अँधेरा है, या अँधेरे को लपेटे ये लौ ?

उसकी गर्माहट छू भर लेने मे अँधेरा बीता देगा ये रात,

या उसकी ख्वाहिश सुन रात भर खिलखिलाती इतराती रहेगी ये लौ!

लौ से लिपटा ये अँधेरा है, या अँधेरे को लपेटे ये लौ ?

पर शायद, जिद्दी ये लौ अपनी ही गर्मी मे पिघल जायेगी,

या शायद झल्ला कर उसके गुरूर से, अँधेरा दूर भाग जायेगा!

चलने दो ये कशमकश यूँ ही,

समेटने दो लौ को ये अँधेरा,

रहने तो लिपटा अँधेरे को इस लौ से!

Meri aur Chand ki kahani!

पढ़ते पढ़ते आँख लग गयी थी शायद!

निन्दासी आँखे मलते मलते सर उठाया तो देखा,

सूरज दबे पाँव जाने की तैयारी में था,

पर ठंडाई सी वो शाम बादलों की गर्माहट ओढ़ वहीँ रुक गयी थी!

खुद को खुद मे ही समेट मैं भी वापस बैठ गयी वहीँ कुर्सी पर…तकती उन बादलों को!

कुछ ही खामोश से लम्हे बीते थे की बिजली का फरमान आ गया,

गूंजा तो पूरा आसमान पर ये निट्ठले बादल कहाँ सुनने वाले थे,

कुछ देर कड़कती रही फिर अनमनी हो चली गयी वहां से!

उसके जाते ही जाने कहाँ से कूद पड़ा ये चाँद!

बादलों मे छुपते छुपाते किससे मिलने आया है ये आज!

कहीं वो मैं तो नहीं !!!

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I come here often, never saw you before!

I told her one night!

She just smiled at me and said Yes, I am new here!

Soon I found her waiting for me on most evening!

Sometime reading, sometime singing, sometime just looking at my blue way!

Every night we’ll exchange few smiles and then she’ll go away …

Wishing me a Good Night, not realizing I don’t sleep at nights!

After a long time I am going there today,

Lighting met me on my way asking me to hurry up… Why I asked??

Oh ho …just be quick!! Said she!

A little ahead,  I found bunch of those rowdy clouds!

They just ran to me …offering me a quick ride!!

I don’t mind…but why everyone wants me to be before Time???

Ah ha …I reached!!

There she is …where she is going??

Hey, hey wait… I am here!!

Something Fishy!!

This is what I was doing while I was not writing and dealing with my so called BLOCK!

Isn’t it a nice way of getting away from the things which keep on bothering you!

Two weeks back I shifted to new house – Rented house!!

Couldn’t see those bare walls for long…started pulling out all my random stuff!

Apart from other things I found some ice-cream sticks and some rolls of thread!!

Now this is what is adorning that wall today!!